कोचिंग संस्थानों पर सरकार की सख्ती की तैयारी, डमी स्कूलिंग और भ्रामक विज्ञापनों पर कसेगी शिकंजा

देश में तेजी से बढ़ रही कोचिंग इंडस्ट्री को विनियमित करने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। करीब 58 हजार करोड़ रुपये के इस कारोबार और इससे जुड़े लगभग 7 करोड़ छात्रों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्रालय की ओर से गठित समिति ने कई अहम सिफारिशें की हैं। इनका उद्देश्य छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करना डमी स्कूलिंग पर रोक लगाना और स्कूल शिक्षा को मजबूत बनाना है।
समिति ने कोचिंग संस्थानों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने और सख्त नियम लागू करने की सिफारिश की है। साथ ही जेईई नीट-यूजी और सीयूईटी-यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाओं के स्वरूप में बदलाव का भी सुझाव दिया गया है ताकि छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम हो और स्कूली शिक्षा को अधिक महत्व मिले।
सिफारिशों के अनुसार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के कोचिंग में दाखिले पर सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। इसके अलावा 100 प्रतिशत चयन जैसे भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने और कोचिंग संस्थानों को फैकल्टी की योग्यता तथा सफल छात्रों का सत्यापित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
समिति ने डमी स्कूलिंग पर रोक लगाने के लिए स्कूलों में रियल-टाइम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है। साथ ही स्कूल के समय में कोचिंग चलाने पर रोक और छात्रों के लिए कोचिंग के घंटों को सीमित करने की भी सिफारिश की गई है।
छात्रों में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं को देखते हुए सभी कोचिंग ताकि जरूरतमंद छात्रों को समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सके।
जून 2025 में गठित नौ सदस्यीय समिति की अंतिम रिपोर्ट जल्द ही केंद्र सरकार को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट पर फैसला होने के बाद कोचिंग संस्थानों के संचालन और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े नए नियम लागू किए जा सकते हैं।


