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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, UBT को एक और झटका

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MUMBAI : महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को एक और बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में छह सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के करीबी सहयोगी सचिन अहीर ने भी शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे उद्धव ठाकरे खेमे के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने 30 जून को महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए महायुति के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी मौजूद रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र में कथित operation tiger -3 के तौर पर देखा जा रहा है। शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव ठाकरे खेमे के कई अन्य विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं।

सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे का बेहद भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से शिवसेना में शामिल कराया गया था और मुंबई के वर्ली क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आदित्य ठाकरे के पहले विधानसभा चुनाव में संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही थी। वर्ष 2022 में उन्हें विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) भी बनाया गया था।

सचिन अहीर के पार्टी छोड़ने पर आदित्य ठाकरे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें हर सम्मान और जिम्मेदारी दी थी। उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन आपको सब कुछ देता है तो कठिन समय में उसके साथ खड़ा रहना भी आपकी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिद्धांतों की कमी को दर्शाता है।

उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर का स्वागत करते हुए उन्हें Rajneeti ka tendulkar बताया। उन्होंने कहा कि सचिन अहीर जमीनी स्तर के नेता हैं और जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। शिंदे ने कहा कि उनके पार्टी में आने से संगठन और मजबूत होगा।

महायुति में विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए पहले अन्य नेताओं के नामों की चर्चा थी लेकिन शिंदे गुट ने पार्टी के पुराने नेताओं के बजाय उसी दिन शिवसेना (UBT) छोड़कर आए सचिन अहीर पर भरोसा जताया। इसे शिंदे गुट की रणनीतिक चाल माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद से शिंदे गुट लगातार अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने में जुटा है। पहले शिवसेना (UBT) के छह सांसदों का साथ छोड़ना और अब सचिन अहीर जैसे वरिष्ठ नेता का पाला बदलना उद्धव ठाकरे के लिए लगातार बढ़ती राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।