आरएसएस आदिवासी पहचान को खत्म करने पर तुला है : दयामनी बरला, ‘आदिवासियत बचाओ महारैली’ का ऐलान

RANCHI : आदिवासी पहचान संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर आयोजित एक बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बरला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर आदिवासी पहचान को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अस्तित्व जल-जंगल-जमीन और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सभी जनपक्षीय ताकतों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की जरूरत है। इसके लिए राज्यभर में लोगों को संगठित किया जाएगा।
बैठक के अंत में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि आने वाले दिनों में प्रमंडल और जिला स्तर पर सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर के दौरान रांची में “आदिवासियत बचाओ महारैली” निकाली जाएगी। इस महारैली के माध्यम से आदिवासी पहचान संस्कृति भाषा परंपरा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
कार्यक्रम में बहादुर उरांव बिंदु सोरेन बहा लिंडा चंद्र प्रभात मुंडा दयामनी बरला देवकी नंदन बेदिया दामु मुंडा ज्योति कुजूर कुमार चंद्र मार्डी प्रकाश पूर्ति प्रकाश टोप्पो रजनी मुर्मू रेनू उरां रोज खाखा सिद्धेश्वर सरदार सुशीला बोदरा सुषमा बिरूली और श्यामल मार्डी समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन बासींग हस्सा डेमका सोय एलिना होरो रमेश जेराई सुखनाथ लोहरा और साधु हो ने किया।

