डेढ़ साल के मासूम की आंखों की रोशनी गई, गलत दवा देने का आरोप; जांच के आदेश

सागर (मध्य प्रदेश): सर्दी और आंखों की लाली के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे बच्चे की हालत बिगड़ी, परिजनों ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का लगाया आरोप
मध्य प्रदेश के सागर जिले से चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां डेढ़ साल के एक मासूम की आंखों की रोशनी चले जाने का आरोप सरकारी अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ पर लगा है। परिजनों का कहना है कि सर्दी और आंखों की लाली का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे बच्चे को गलत दवा दे दी गई, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसकी आंखों की रोशनी चली गई।
जानकारी के अनुसार, 1 साल 7 महीने का विनय विश्वकर्मा 29 मई को सर्दी और आंखों में लालपन की शिकायत लेकर अपने पिता इंद्रराज विश्वकर्मा के साथ बंडा सिविल अस्पताल पहुंचा था। यहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने जांच के बाद आई ड्रॉप, पैरासिटामोल सिरप, एक इंजेक्शन और अन्य दवाइयां लिखीं।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने बच्चे की आंखों में आई ड्रॉप की जगह नाक में डाली जाने वाली नोजल ड्रॉप डाल दी। इसके कुछ घंटों बाद ही बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। पहले उसे सागर जिला अस्पताल और फिर भोपाल एम्स रेफर किया गया। एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि आंखों में गंभीर संक्रमण फैल चुका है और बच्चे की दोनों आंखों की रोशनी जा चुकी है।
पीड़ित पिता ने मामले में संबंधित डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने सही दवा लिखी थी, लेकिन केमिस्ट ने कथित तौर पर गलत दवा दे दी। उनका कहना है कि यदि बच्चे के परिजन दवा लेकर दोबारा उनके पास आते, तो वह गलती पकड़ लेते।
इधर, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) योगेंद्र खटीक ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

