बेटी RSS के करीब पिता और भाई ED के घेरे में आखिर क्यों चर्चा में है रामेश्वर उरांव का परिवार

निशा उरांव प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था विकास भारती से जुड़ी हुई हैं। इस संस्था का संचालन पद्मश्री सम्मान से सम्मानित अशोक भगत करते हैं। अशोक भगत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी संस्था ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में काम करती है।
निशा उरांव विकास भारती के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। इन मंचों पर वह आदिवासी समाज के पारंपरिक कानून पेसा कानून और उनके संवैधानिक अधिकारों पर व्याख्यान देती हैं। साथ ही वह आदिवासी समुदाय से अपनी सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं से जुड़े रहने की अपील भी करती हैं। उनकी यह सक्रियता राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
एक ओर परिवार के कुछ सदस्य ED की जांच के दायरे में हैं तो दूसरी ओर निशा उरांव की सामाजिक और वैचारिक भूमिका को लेकर भी लगातार राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। यही वजह है कि रामेश्वर उरांव का परिवार इन दिनों झारखंड की राजनीति में सुर्खियों में बना हुआ है।
झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव का परिवार इन दिनों कई वजहों से चर्चा में है। एक ओर जहां उनके बेटे और भाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं वहीं दूसरी ओर उनकी बेटी निशा उरांव की वैचारिक सक्रियता भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
निशा उरांव प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था विकास भारती से जुड़ी हुई हैं। इस संस्था का संचालन पद्मश्री सम्मान से सम्मानित अशोक भगत करते हैं। अशोक भगत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी संस्था ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में काम करती है।
निशा उरांव विकास भारती के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। इन मंचों पर वह आदिवासी समाज के पारंपरिक कानून पेसा कानून और उनके संवैधानिक अधिकारों पर व्याख्यान देती हैं। साथ ही वह आदिवासी समुदाय से अपनी सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं से जुड़े रहने की अपील भी करती हैं। उनकी यह सक्रियता राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
एक ओर परिवार के कुछ सदस्य ED की जांच के दायरे में हैं तो दूसरी ओर निशा उरांव की सामाजिक और वैचारिक भूमिका को लेकर भी लगातार राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। यही वजह है कि रामेश्वर उरांव का परिवार इन दिनों झारखंड की राजनीति में सुर्खियों में बना हुआ है।


