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राम मंदिर दान चोरी मामला: ‘भगवान राम ने अखिलेश यादव को दी थी जानकारी’, सपा नेता पवन पांडेय का बड़ा दावा

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AYODHYA : राम मंदिर में दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कथित घोटाला चोरी में शामिल लोगों के बीच पैसे के बंटवारे को लेकर हुए विवाद के कारण उजागर हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि खुद भगवान राम ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस कथित गड़बड़ी की जानकारी दी थी।

एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान पवन पांडेय ने कहा कि अखिलेश यादव को पहले ही मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं की सूचना मिल चुकी थी। उनके अनुसार अखिलेश यादव ने उनसे चढ़ावे, गहनों और दान राशि में गड़बड़ी की खबरों की पुष्टि की थी, जिस पर उन्होंने कहा था कि ये बातें पूरी तरह सही हैं। पांडेय का दावा है कि इसके बाद अखिलेश यादव ने 7 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस मुद्दे को उठाया जिससे मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।’भगवान राम ने अखिलेश यादव को बताया’पवन पांडेय ने दावा करते हुए कहा कि भगवान राम ने स्वयं अखिलेश यादव को यह एहसास कराया कि उनके मंदिर में चढ़ावे और दान की लूट हो रही है।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव भगवान शिव के भक्त हैं और केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करा रहे हैं इसलिए भगवान राम ने उन्हें इस कथित घोटाले का खुलासा करने का माध्यम बनाया।’पैसों के बंटवारे के विवाद से खुला मामला’सपा नेता ने आरोप लगाया कि दान पेटियों की गिनती करने वाले लोगों के बीच पैसों और गहनों के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। इसी अंदरूनी लड़ाई के चलते कथित चोरी का मामला सामने आया। उनका दावा है कि यह गड़बड़ी कई वर्षों से चल रही थी और हाल के महीनों की घटना नहीं है।

ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों पर भी लगाए आरोपपवन पांडेय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा पर आरोप लगाया कि उन्होंने कथित गड़बड़ियों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की और आरोपियों को संरक्षण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिकायतें झूठी थीं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।SIT जांच पर उठाए सवालपवन पांडेय ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जब कथित रूप से कचरे के ढेर से 80 लाख रुपये और अन्य स्थानों से नकदी बरामद होने के दावे किए जा रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वत: संज्ञान लेने वर्तमान ट्रस्ट को भंग करने और किसी मौजूदा या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग की।

हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि पवन पांडेय द्वारा लगाए गए ये सभी आरोप और दावे उनके व्यक्तिगत बयान हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों या अदालत द्वारा नहीं की गई है और मामले की जांच जारी है।