AI से हो रही पहचान की चोरी फेस और आवाज क्लोन कर लोगों को बना रहे शिकार जानिए नए साइबर स्कैम से कैसे बचें

NEW DELHI : साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठगों ने फेस-वॉइस क्लोनिंग स्कैम के जरिए लोगों की पहचान चुराकर ठगी करने का नया तरीका अपनाया है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने इस नए AI आधारित साइबर फ्रॉड को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
पुलिस के अनुसार ठग मॉल मेट्रो स्टेशन बाजार और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोगों से मोबाइल चलाने में मदद मांगते हैं। वे खुद को तकनीक की जानकारी नहीं होने वाला व्यक्ति बताते हैं। इस दौरान उनका मोबाइल पहले से ही वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग मोड में चालू रहता है।
जैसे ही कोई व्यक्ति मदद के लिए फोन हाथ में लेता है उसके चेहरे और आवाज की रिकॉर्डिंग कुछ ही सेकंड में हो जाती है। बाद में इसी डेटा का इस्तेमाल कर AI की मदद से चेहरे और आवाज की डिजिटल कॉपी तैयार की जाती है जिसे फेस-वॉइस क्लोनिंग कहा जाता है।
साइबर अपराधी पहले भीड़भाड़ वाली जगहों पर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जो मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। वे किसी ऐप को खोलने या फोन चलाने में सहायता मांगते हैं। जैसे ही व्यक्ति फोन हाथ में लेता है कैमरा और माइक्रोफोन उसके चेहरे और आवाज को रिकॉर्ड कर लेते हैं।
इसके बाद AI तकनीक की मदद से स्कैमर्स डीपफेक वीडियो और वॉइस क्लोन तैयार करते हैं। इनका इस्तेमाल फर्जी कॉल वीडियो कॉल सोशल मीडिया प्रोफाइल या बैंकिंग फ्रॉड जैसी वारदातों में किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लोग इस स्कैम के ज्यादा शिकार बन सकते हैं जो सोशल मीडिया पर अपनी फोटो और वीडियो सार्वजनिक रूप से साझा करते हैं या तकनीक के प्रति ज्यादा जागरूक नहीं हैं। कुछ सेकंड की आवाज और वीडियो भी अपराधियों के लिए पर्याप्त हो सकते हैं।
इन तरीकों से रहें सुरक्षित
- अनजान व्यक्ति का मोबाइल लेकर उसकी तकनीकी मदद करने से पहले सतर्क रहें।
- किसी का फोन हाथ में लेते समय कैमरा और रिकॉर्डिंग की स्थिति पर ध्यान दें।
- सोशल मीडिया प्रोफाइल को पब्लिक रखने से बचें और प्राइवेसी सेटिंग मजबूत करें।
- अपनी फोटो और वीडियो जरूरत से ज्यादा सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा न करें।
- किसी वीडियो कॉल या ऑडियो संदेश के आधार पर पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर पुष्टि करें।
- बैंक खाते और सोशल मीडिया अकाउंट पर टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर चालू रखें।
- किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें।
- परिवार के सदस्यों खासकर बुजुर्गों और बच्चों को इस नए साइबर स्कैम के बारे में जागरूक करें।
- किसी भी संदिग्ध साइबर ठगी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर दें।
- यदि आपकी पहचान का दुरुपयोग होने की आशंका हो तो तुरंत संबंधित बैंक और पुलिस को सूचित करें।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे मामलों में तेजी आ सकती है। इसलिए थोड़ी सी सतर्कता और डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन कर इस तरह के साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।


