बाल विवाह रोकने की तैयारी: महाराष्ट्र में शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि छापना हो सकता है अनिवार्य

MUMBAI : महाराष्ट्र सरकार राज्य में बाल विवाह पर लगाम लगाने के लिए नया नियम लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित नियम के तहत शादी के निमंत्रण पत्र ( wedding card ) पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छापना अनिवार्य किया जा सकता है। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी।
मंत्री ने बताया कि शादी के कार्ड पर जन्मतिथि दर्ज होने से विवाह करने वाले जोड़े की उम्र का सत्यापन करना आसान होगा और बाल विवाह के मामलों पर प्रभावी ढंग से निगरानी रखी जा सकेगी। यह प्रस्ताव महाराष्ट्र राज्य बाल संरक्षण आयोग की सिफारिश के बाद सामने आया है क्योंकि राज्य के कुछ जिलों में बाल विवाह के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई थी।
विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के कई जिलों में बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है। सबसे अधिक मामले परभणी जिले में दर्ज किए गए जहां लगभग 48 प्रतिशत लड़कियों का विवाह बालिग होने से पहले हुआ। इसके बाद बीड में 43.7 प्रतिशत धुले में 40.5 प्रतिशत और सोलापुर में 40.3 प्रतिशत मामले सामने आए।
हालांकि हाल के वर्षों में स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2019-21 के दौरान बाल विवाह की दर 21.9 प्रतिशत से घटकर 19.6 प्रतिशत हो गई, जो राष्ट्रीय औसत 20.1 प्रतिशत से कम है। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में 1,434 बाल विवाहों को रोका गया।
अदिति तटकरे ने कहा कि राजस्थान में शादी के कार्ड पर जन्मतिथि दर्ज करने जैसे उपायों से बाल विवाह रोकने में मदद मिली है। इसी मॉडल का अध्ययन कर महाराष्ट्र सरकार भी इसे लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
प्रस्तावित नियम के तहत प्रिंटिंग प्रेस मैरिज हॉल संचालकों और इवेंट ऑर्गेनाइजरों को भी जिम्मेदारी दी जा सकती है ताकि वे नियमों के पालन में सहयोग करें। सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा जाएगा।
सरकार के अनुसार बीड और मराठवाड़ा क्षेत्र में गन्ना कटाई के मौसम के दौरान बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। मजदूरों के मौसमी पलायन के दौरान बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा प्रभावित होती है जिससे बाल विवाह का खतरा बढ़ जाता है।
इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों तक पहुंच बढ़ाने बाल देखभाल केंद्रों का विस्तार करने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम कर रही है। महाराष्ट्र सरकार जल्द ही राजस्थान मॉडल का विस्तृत अध्ययन कर अंतिम निर्णय ले सकती है।

