JHARKHAND: झारखंड में बढ़ रही विधवा महिलाओं की संख्या, सरकारी योजनाएं और आत्मनिर्भरता की पहल बनीं सहारा

RANCHI : झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में विधवा महिलाओं की बढ़ती संख्या सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय बनती जा रही है। ब्राम्बे और धोदराही जैसे गांवों की तस्वीर यह दर्शाती है कि पति की असमय मृत्यु के बाद महिलाओं को न केवल भावनात्मक आघात झेलना पड़ता है बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं और स्वयं सहायता समूह उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आ रहे हैं।
राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं के तहत महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण स्वरोजगार के अवसर तथा आय बढ़ाने वाली गतिविधियों के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।
इसी क्रम में अन्नपूर्णा योजना भी जरूरतमंद महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रही है। इस योजना का लाभ उन बुजुर्ग और बेसहारा विधवा महिलाओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह 10 किलोग्राम खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है जिससे उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है
ब्राम्बे और धोदराही जैसे गांवों की कहानियां यह स्पष्ट करती हैं कि विधवा महिलाओं की बढ़ती संख्या केवल व्यक्तिगत दुख या पारिवारिक समस्या नहीं है बल्कि इसके पीछे सामाजिक और आर्थिक कारण भी जुड़े हुए हैं। हालांकि सरकारी योजनाओ स्वयं सहायता समूहों और कौशल विकास कार्यक्रमों की मदद से कई महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी होने का प्रयास कर रही हैं।
चुनौतियां आज भी मौजूद हैं, लेकिन झारखंड के अनेक गांवों में महिलाएं अब केवल सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। यह बदलाव न केवल उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है बल्कि समाज में उनकी पहचान और सम्मान को भी मजबूत कर रहा है।

