50093

राज्यसभा चुनाव में हार के बाद झारखंड में बढ़ी सियासी हलचल, झामुमो के संकेतों से गठबंधन पर उठे सवाल

खबर को शेयर करें
50093

झारखंड राज्यसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को एक सीट पर मिली हार के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से आए बयान के बाद गठबंधन के भविष्य और सहयोगी दलों की भूमिका को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या गठबंधन में शामिल कुछ दलों के खिलाफ कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर पर ही लिया जाएगा।

सोमवार को झामुमो के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्यसभा चुनाव में धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इंडिया गठबंधन के 50 विधायक एकजुट होकर चुनाव मैदान में डटे रहे। उन्होंने दावा किया कि आज भी 50 विधायक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं, जबकि 30 विधायक भाजपा के साथ हैं।

सुप्रियो भट्टाचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद गठबंधन के भीतर कुछ सहयोगी दलों की भूमिका को लेकर नाराजगी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह हार केवल कांग्रेस उम्मीदवार की नहीं, बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन की हार मानी जा रही है। बहुमत का आंकड़ा होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी की हार ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने खुलकर आरोप लगाया था कि राजद और माले ने गठबंधन के साथ विश्वासघात किया है। कांग्रेस का दावा है कि उसके और झामुमो के विधायकों ने एकजुट होकर मतदान किया, लेकिन कुछ सहयोगी दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को फायदा पहुंचाया।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा था कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। वहीं झामुमो की ओर से आए ताजा संकेतों ने इस पूरे मामले को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।

गौरतलब है कि झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान हुआ था। चुनाव मैदान में झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी थे। एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत थी। गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन होने के कारण झामुमो और कांग्रेस दोनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।

हालांकि चुनाव परिणाम ने सभी को चौंका दिया। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले। इसके बाद राजद और माले पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगने लगे और गठबंधन के भीतर अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई।

अब सबकी नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में नए समीकरण और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।