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JHARKHAND NEWS :झारखंड में अवैध खनन बना गंभीर चुनौती, मजदूरों की जान पर खतरा; पर्यावरण और राजस्व को भी भारी नुकसान

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RANCHI : झारखंड में अवैध खनन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य के बड़कागांव बरियातू अरगड्डा समेत कई क्षेत्रों में सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि यह अब छिटपुट घटनाओं तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि एक संगठित और संरचनात्मक समस्या का रूप ले चुका है।

अवैध खनन के कारण जहां मजदूरों की जान जोखिम में पड़ रही है वहीं सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और अवैध नेटवर्क लगातार मजबूत होते जा रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार अवैध खनन का प्रभाव केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर पर्यावरण और वन क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है।

कई स्थानों पर वन भूमि के भीतर सुरंगें बनाकर अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा है जिससे मिट्टी कटाव भू-स्खलन भूजल स्तर में बदलाव और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और विभिन्न अदालतों में कई मामले लंबित हैं। हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने भी अवैध खनन को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर टिप्पणी की थी।खनन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में कोल ब्लॉक आवंटित हो चुके हैं वहां पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से वैध खनन परियोजनाएं शुरू करने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी और निगरानी व्यवस्था भी मजबूत होगी।

वैध खनन परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों पर्यावरणीय नियमों और सामाजिक दायित्वों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल नई परियोजनाएं शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होगा। अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने तकनीकी निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अवैध खनन की पूरी श्रृंखला—उत्खनन परिवह भंडारण और बिक्री—पर एक साथ कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक डोजरिंग जब्ती और छापेमारी जैसी कार्रवाई केवल अस्थायी राहत ही साबित होगी। ऐसे में झारखंड के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अगली दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा या फिर अवैध खनन के खिलाफ इस बार व्यापक और स्थायी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।