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PF क्लेम पास कराने के लिए ऑनलाइन घूस लेना पड़ा महंगा, EPFO कर्मचारी को 3 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माना

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Bengaluru : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में ऑनलाइन पीएफ क्लेम सेटलमेंट के बदले रिश्वत लेने वाले एक कर्मचारी को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। बेंगलुरु स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत ने ईपीएफओ के वरिष्ठ सोशल सिक्योरिटी असिस्टेंट एस. प्रसन्ना को तीन साल के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

अदालत ने पाया कि एस. प्रसन्ना ने लंबित पड़े पीएफ क्लेम्स को मंजूरी देने के बदले छह खाताधारकों से ऑनलाइन माध्यम से रिश्वत ली थी। पीएफ खाताधारकों ने अपने फंड की निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था लेकिन उनके क्लेम लंबित पड़े थे। इन्हें निपटाने के बदले प्रसन्ना ने PhonePe के जरिए रिश्वत की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि संबंधित लाभार्थियों ने रिश्वत की रकम सीधे प्रसन्ना के PhonePe UPI आईडी से जुड़े सरकारी बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सतीश जे. बाली ने कहा कि यह मामला डिजिटल माध्यम से रिश्वत लेने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत दर्ज पारंपरिक नकद रिश्वतखोरी के मामलों से अलग है।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 और 2022 के दौरान प्रसन्ना ने लंबित पीएफ क्लेम्स को मंजूरी देने के लिए लाभार्थियों से 500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक की रिश्वत मांगी थी। क्लेम राशि खातों में पहुंचने के बाद लाभार्थियों ने तय रकम उसके खाते में ट्रांसफर कर दी थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिश्वत की रकम भले ही कम थी लेकिन यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि सरकारी कर्मचारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध लाभ प्राप्त किया। कोर्ट ने माना कि डिजिटल भुगतान के माध्यम से प्राप्त की गई राशि भी रिश्वतखोरी की श्रेणी में आती है और इसे गंभीर भ्रष्टाचार माना जाएगा।

इस फैसले को डिजिटल लेनदेन के जरिए होने वाली रिश्वतखोरी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है।