JHARKHAND NEWS : झारखंड में तीन महीने में 13,647 अपराध दर्ज, हत्या से लेकर किडनैपिंग और रेप के मामलों ने बढ़ाई चिंता

RANCHI : झारखंड में साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) के दौरान अपराध के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। झारखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार तीन महीनों में राज्यभर में कुल 13,647 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इस दौरान हत्या किडनैपिंग रेप चोरी दंगे और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कई मामले सामने आए। सबसे अधिक मामले “अन्य अपराध” श्रेणी में दर्ज किए गए जिनकी संख्या 9,837 रही।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी में 4,930 फरवरी में 4,155 और मार्च में 4,562 मामले दर्ज किए गए। मार्च महीने में हत्या किडनैपिंग और दंगों की घटनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
तीन महीनों के दौरान राज्य में 329 हत्या के मामले दर्ज हुए। जनवरी में 106 फरवरी में 89 और मार्च में सबसे अधिक 134 हत्या की घटनाएं सामने आईं। वहीं किडनैपिंग के 434 मामले दर्ज किए गए जिनमें मार्च में 181 मामले सामने आए जो तीनों महीनों में सबसे अधिक रहे।
फिरौती के लिए अपहरण के कुल 9 मामले दर्ज किए गए। जनवरी में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जबकि फरवरी में 5 और मार्च में 4 मामले दर्ज हुए।
पहली तिमाही में राज्य में 374 रेप के मामले दर्ज किए गए। जनवरी में 102 फरवरी में 134 और मार्च में 138 मामले सामने आए। वहीं दहेज हत्या के 57 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा डायन प्रथा से जुड़ी 13 हत्याएं भी दर्ज की गईं जो सामाजिक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय हैं।
अपराध आंकड़ों के अनुसार चोरी की घटनाएं भी लगातार जारी रहीं। तीन महीनों में 1,703 चोरी के मामले दर्ज किए गए जबकि 447 घरों में चोरी की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा 40 सड़क लूट 9 सड़क डकैती 7 घर में घुसकर डकैती और 3 घर में घुसकर लूट के मामले दर्ज किए गए।
जनवरी से मार्च के बीच राज्य में 222 दंगे दर्ज किए गए। वहीं 28 नक्सल संबंधित मामले और 7 विस्फोटक मामलों का भी रिकॉर्ड दर्ज किया गया। आर्म्स एक्ट के तहत कुल 130 मामले दर्ज हुए।
तीनों महीनों की तुलना करें तो मार्च में अपराध के कई प्रमुख मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हत्या किडनैपिंग रेप और दंगों के मामलों में मार्च का आंकड़ा जनवरी और फरवरी की तुलना में अधिक रहा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पहली तिमाही में दर्ज कुल 13,647 मामलों में से करीब 72 प्रतिशत मामले “अन्य अपराध” श्रेणी में शामिल हैं।
झारखंड में अपराध के ये आंकड़े कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा संपत्ति संबंधी अपराधों की रोकथाम और संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस और प्रशासन को और अधिक सख्त रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।

