10 साल पुराने POCSO मामले में आया बड़ा फैसला!! प्रकाश महतो दोषी करार, 14 साल की सश्रम कारावास की मिली सजा, अधिवक्ता मोहम्मद अरशद अंसारी बोले “न्याय की हुई जीत”

सरायकेला चिल्ड्रेन कोर्ट ने करीब 10 वर्ष पुराने एक POCSO मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण का दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी प्रकाश महतो को 14 वर्ष के Rigorous Imprisonment तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला सरायकेला महिला थाना कांड संख्या 04/2016 से जुड़ा है। न्यायालय में प्रस्तुत अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 जुलाई 2016 को पीड़िता अपने घर में अकेली थी। इसी दौरान गांव का एक किशोर उसके घर में घुस गया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता और उसके परिजनों ने आरोपी के परिवार को इसकी जानकारी दी तथा गांव में पंचायत भी बुलाई गई लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद 8 जुलाई 2016 को महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (चिल्ड्रेन कोर्ट) ब्रज किशोर पांडेय की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके माता-पिता, चिकित्सक, जांच अधिकारी समेत कुल छह गवाहों को पेश किया। अदालत ने पीड़िता की गवाही को विश्वसनीय माना और कहा कि बचाव पक्ष उसके बयान में कोई ऐसा विरोधाभास साबित नहीं कर पाया जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो सके।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी और उपलब्ध साक्ष्य यह साबित करते हैं कि आरोपी ने उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए थे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल रिपोर्ट में हालिया यौन संबंध के स्पष्ट संकेत नहीं मिलने मात्र से अपराध को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण घटना के लगभग डेढ़ महीने बाद कराया गया था।
कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि धारा 354 के आरोप से उसे बरी कर दिया गया। फैसले में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है।
पीड़िता की ओर से मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट मोहम्मद अरशद अंसारी ने न्यायालय के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यह निर्णय न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाकर पीड़िता को न्याय दिलाने का काम किया है।


