JHARKHAND : सरयू राय ने दिया नया राजनीतिक फॉर्मूला, कांग्रेस से दूरी और जयराम महतो को साथ लेने की सलाह

RANCHI : झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच विधायक सरयू राय के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस और “भ्रष्ट मध्यस्थों” से दूरी बनाकर काम करने की सलाह देते हुए जयराम महतो को साथ लेकर आगे बढ़ने का सुझाव दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरयू राय की यह सलाह हाल के घटनाक्रमों और महागठबंधन के भीतर उभरते मतभेदों की ओर इशारा करती है। राज्यसभा चुनाव से पहले झामुमो और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर गंभीर असहमति सामने आई थी। कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था जबकि झामुमो नेतृत्व ने इस पर नाराजगी जताई थी कि उनसे पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया गया। बाद में दोनों दलों को समझौते के रास्ते पर आना पड़ा।
विश्लेषकों के अनुसार सरयू राय लंबे समय से कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरियों और आंतरिक गुटबाजी को झारखंड सरकार के लिए चुनौती बताते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की घटनाओं के बाद उनके इस तर्क को और बल मिलता दिख रहा है। उनका मानना है कि कांग्रेस महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रही है।
झामुमो और कांग्रेस के बीच राजनीतिक वर्चस्व को लेकर समय-समय पर खींचतान भी सामने आती रही है। राज्यसभा सीट को लेकर हालिया विवाद ने दोनों दलों के रिश्तों में मौजूद तनाव को फिर उजागर कर दिया था।
वहीं, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के सुप्रीमो और विधायक जयराम महतो भी पिछले कुछ महीनों से खुद को भाजपा और कांग्रेस दोनों से अलग राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करते रहे हैं। हालांकि उन्होंने सरकार में शामिल होने की संभावना पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है लेकिन कई मौकों पर यह जरूर कहा है कि झारखंड के हित में आने वाले प्रस्तावों का समर्थन करने पर विचार किया जा सकता है।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में सरयू राय द्वारा जयराम महतो का नाम सामने लाए जाने को झारखंड की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की चर्चा के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस संबंध में झामुमो कांग्रेस या जयराम महतो की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


