Jamshedpur:- मानगो दंगा मामले में 9 साल बाद 19 आरोपी बाइज्जत बरी, अधिवक्ता ज़ाहिद इक़बाल ने कहा “न्याय की हुई जीत”

2017 में मॉब लिंचिंग और बच्चा चोरी की घटनाओं के विरोध में मुस्लिम एकता मंच द्वारा प्रदर्शन किया गया था। जिसके बाद पुलिस ने दंगा, पत्थरबाजी और थाने में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए 400 से 500 से लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी तथा 100 से ज्यादा लोगों को जेल भेजा गया था।
अब 9 साल बाद वर्ष 2026 में जमशेदपुर सिविल कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मानगो थाना में दर्ज एक मामले में नामजद सभी 19 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया गया।
इस केस में अभियोजन पक्ष द्वारा पुलिस पदाधिकारियों की गवाही कराई गई थी जिनमें उलीडीह ओपी के तत्कालीन प्रभारी मुकेश चौधरी, मानगो थाना के तत्कालीन प्रभारी फूलन नाथ, आजादनगर थाना के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र ठाकुर और सुधीर कुमार शामिल थे। ये सभी चार्जशीट में गवाह थे।
गवाही के बावजूद अभियोजन पक्ष साक्ष्य जुटाने में नाकाम रहा और केस को साबित नहीं कर पाया। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने सभी 19 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया।
इनमें मुख्य रूप से हाजी फ़िरोज़ ख़ान, नूरुल हक़ झुन्ना, शेरू, बिलाल गुफरानी, आफताब आलम उर्फ सोनू, लल्लू हफ़ीज़ , महताब आलम और तौफ़ीक़ अहमद शामिल हैं।
अधिवक्ता ज़ाहिद इक़बाल ने कहा कि पुलिस की जांच में गंभीर लापरवाही हुई और कई बेगुनाह लोगों को जेल भेजा गया जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा। उन्होंने जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की बात कही है
9 साल बाद आया यह फैसला एक बड़ा सवाल छोड़ गया है अगर आरोपी बेगुनाह थे तो उनकी जिंदगी के इन 9 सालों के नुकसान का हिसाब कौन देगा?


