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Jamshedpur Breaking: रील बनाने के क्रम में चांडिल के स्वर्णरेखा नदी में सोनारी का 23 वर्षीय युवक डूबा, अंधेरा होने से रुका सर्च ऑपरेशन…

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जमशेदपुर के सोनारी थाना क्षेत्र के पंचवटी नगर स्थित सिद्धो-कान्हू बस्ती जोन नंबर-2 निवासी 23 वर्षीय युवक प्रेम कुमार के स्वर्णरेखा नदी में डूब जाने की खबर से परिवार और इलाके में मातम पसरा हुआ है। यह घटना सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध जायदा मंदिर के समीप सोमवार को हुई जहां नहाने के दौरान युवक गहरे पानी में चला गया और देखते ही देखते नदी में समा गया।

मिली जानकारी के अनुसार प्रेम कुमार अपने दोस्त आशुदेव कुमार के साथ बाइक से चांडिल घूमने गया था। दोनों जायदा मंदिर के पास पहुंचे और वहां बाइक खड़ी कर स्वर्णरेखा नदी में नहाने लगे। बताया जा रहा है कि आशुदेव कुमार अपने दोस्त का वीडियो और रील बना रहा था। इसी दौरान प्रेम कुमार नदी के गहरे हिस्से में पहुंच गया और डूबने लगा।

घटना को देख दोस्त ने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और उसे बचाने का प्रयास किया। हालांकि तब तक प्रेम कुमार पानी में लापता हो चुका था। स्थानीय लोगों की मदद से उसकी तलाश शुरू की गई। गोताखोरों को भी बुलाया गया और चौका थाना पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंचे जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

काफी देर तक नदी में खोजबीन चलती रही लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया। वहीं अंधेरा बढ़ने के कारण सर्च अभियान को रोकना पड़ा। अब मंगलवार सुबह फिर से खोज अभियान शुरू किए जाने की बात कही जा रही है।

यह घटना एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर हर बार नदी तालाब में डूबने की घटनाओं के बाद खोज अभियान अंधेरा होते ही क्यों रोक दिया जाता है? क्या जमशेदपुर और आसपास के जिलों में अब तक ऐसी आधुनिक रेस्क्यू व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी है जो रात के समय भी प्रभावी तरीके से सर्च ऑपरेशन चला सके?

आज देश के कई हिस्सों में ड्रोन, अंडरवॉटर कैमरा, सोनार तकनीक और आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद हमारे क्षेत्र में अधिकांश मामलों में गोताखोरों और सीमित संसाधनों के भरोसे ही अभियान चलाया जाता है। नतीजा यह होता है कि अंधेरा होते ही खोजबीन रोकनी पड़ती है और फिर अगले दिन सुबह दोबारा अभियान शुरू किया जाता है तब तक व्यक्ति की जान चली जाती है।

सवाल यह है कि क्या हर बार किसी परिवार को पूरी रात अपने प्रियजन की खबर का इंतजार करते हुए इसी दर्द से गुजरना पड़ेगा? क्या अब समय नहीं आ गया है कि जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां और आसपास के जिलों में जल रेस्क्यू के लिए अत्याधुनिक तकनीक और 24 घंटे सक्रिय रहने वाली विशेष टीमों की व्यवस्था की जाए ताकि आपात स्थिति में समय रहते प्रभावी कार्रवाई संभव हो सके?