कुड़मी समुदाय की एसटी मांग पर तनाव: सरना समिति का विरोध, रांची में 14 सितंबर को बाइक रैली…

Jharkhand: झारखंड, बंगाल और ओडिशा में कुड़मी समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग को लेकर तनाव बढ़ गया है। कुड़मी समुदाय अपने अधिकारों की मांग कर रहा है जबकि आदिवासी संगठनों, विशेषकर केंद्रीय सरना समिति इस पर कड़ा विरोध कर रहे हैं।
कुड़मी संगठनों का कहना है कि वे ऐतिहासिक रूप से आदिवासी रहे हैं और 1931 के ब्रिटिश गजट में उन्हें एसटी सूची में शामिल किया गया था। 1950 में उन्हें इस सूची से हटाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल किया गया जिसे वे एक ऐतिहासिक भूल मानते हैं। टोटेमिक कुड़मी/कुरमी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा “हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।”
वहीं केंद्रीय सरना समिति का कहना है कि आदिवासी पहचान जन्मजात होती है और कुड़मियों को एसटी दर्जा देना अनुचित होगा। समिति का दावा है कि यह कदम मूल आदिवासियों के अधिकारों नौकरियों और सरकारी सुविधाओं पर असर डाल सकता है।
कुड़मी संगठनों ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो झारखंड, बंगाल और ओडिशा में आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। इसके जवाब में सरना समिति ने रांची में 14 सितंबर को बाइक रैली निकालने की योजना बनाई है।
राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने से मामला और संवेदनशील हो गया है। कुड़मी समुदाय का दावा है कि उनकी आबादी झारखंड में 22%, ओडिशा में 25 लाख और बंगाल में 30 लाख से अधिक है जिससे वे एक महत्वपूर्ण वोट बैंक हैं। आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह विवाद सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा बन सकता है।


