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दिव्यांग सैन्य कैडेट्स के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और सेना से मांगा जवाब…

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Azad Reporter desk: सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग हुए कैडेट्स की कठिनाइयों पर स्वतः संज्ञान लिया है। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और रक्षा बलों से पूछा कि ऐसे कैडेट्स के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है जिन्हें चिकित्सा आधार पर संस्थानों से बाहर कर दिया जाता है।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार को इन कैडेट्स के लिए बीमा कवर और पुनर्वास योजना पर विचार करना चाहिए, ताकि मृत्यु या विकलांगता जैसी स्थिति में उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके। साथ ही कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा कि चिकित्सा खर्च के लिए दी जाने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाने पर भी विचार किया जाए।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा “हम चाहते हैं कि बहादुर कैडेट सेना में बने रहें। चोट या विकलांगता उनके लिए बाधा नहीं बननी चाहिए क्योंकि वे कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं पास करके यहां तक पहुंचे हैं।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस मुद्दे को स्वतः संज्ञान में लिया था। रिपोर्ट में उन कैडेट्स की समस्याओं को सामने रखा गया था जो एनडीए और आईएमए जैसे शीर्ष सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग हो गए थे।

मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी।