नेमरा में पिता के श्राद्ध में जुटे है हेमंत सोरेन, निभा रहे संथाली परंपरा…

Jharkhand: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। वे अपने दिवंगत पिता शिबू सोरेन के श्राद्धकर्म में पूरी संथाली परंपरा के अनुसार हिस्सा ले रहे हैं।
हेमंत सोरेन ने 5 अगस्त को अपने पिता को मुखाग्नि दी थी। उस वक्त उन्होंने संथाली परंपरा के अनुसार वही कपड़ा पहना था जिससे शिबू सोरेन का कफन बनाया गया था। तब से अब तक वह उसी वस्त्र में रह रहे हैं और श्राद्ध पूर्ण होने तक उसी में रहेंगे।
संथाली परंपरा के मुताबिक मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति “मुखिया” कहलाता है और उसे दस दिनों तक गांव के भीतर ही रहकर सारे विधि-विधान पूरे करने होते हैं। मुखिया गांव की सीमा से बाहर नहीं जाता न ही आम जनजीवन में भाग लेता है।
हेमंत सोरेन भी इन परंपराओं का सख्ती से पालन कर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने गांव के बुजुर्गों के साथ बैठकर आगे के कर्मकांडों तीन नहान, दस कर्म और पिंडदान की योजना बनाई। गुरुवार को उन्होंने ‘तीन कर्म’ विधि संपन्न की। श्राद्ध का कार्य 15-16 अगस्त तक चलेगा।
गुरुवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी नेमरा पहुंचकर शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी और हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री गांव से ही राज्य के जरूरी कामकाज फोन पर देख रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकारी गांव में पहुंचकर उनसे मार्गदर्शन ले रहे हैं।
हेमंत सोरेन ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट भी साझा की। उन्होंने लिखा “नेमरा की यह क्रांतिकारी और वीर भूमि, दादाजी की शहादत और बाबा के अथाह संघर्ष की गवाह है… वीर शहीद सोना सोबरन मांझी अमर रहें! झारखण्ड राज्य निर्माता वीर दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें!”

