बैंकिंग कानून संशोधन 2025 : अब बैंकों की बिना दावा वाली रकम जाएगी IEPF में, बड़े बदलाव लागू…

Azad Reporter desk: केंद्र सरकार ने बैंकिंग कानून में बड़ा बदलाव करते हुए Banking Laws (Amendment) Act, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। इस संशोधन के बाद अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) भी अपने यहां पड़ी बिना दावा वाली रकम जैसे शेयर की राशि, ब्याज या बॉन्ड रिडेम्पशन की रकम Investor Education and Protection Fund (IEPF) में ट्रांसफर कर सकेंगे। यह प्रावधान 1 अगस्त 2025 से लागू होगा।
पहले यह नियम केवल कंपनियों पर लागू होता था लेकिन अब बैंक और कंपनियों के बीच का यह अंतर खत्म हो गया है। इस कदम का उद्देश्य निवेशकों का भरोसा बढ़ाना, पारदर्शिता लाना और फंड की केंद्रीय निगरानी को मजबूत करना है।
कानून में किए गए मुख्य बदलाव:
- IEPF में रकम ट्रांसफर
अब बैंक भी कंपनियों की तरह, बिना दावा वाली रकम को IEPF में भेज सकेंगे। - ऑडिटरों को पारिश्रमिक
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अपने वैधानिक ऑडिटरों को पारिश्रमिक देने का अधिकार मिलेगा। इससे ऑडिट की गुणवत्ता और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा। - Substantial Interest की सीमा बढ़ी
अब यह सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह बदलाव 1968 के बाद पहली बार हुआ है। - सहकारी बैंकों के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ा
अब सहकारी बैंकों में निदेशक (अध्यक्ष और पूर्णकालिक निदेशकों को छोड़कर) 10 साल तक पद पर रह सकेंगे। पहले यह अवधि 8 साल थी।
हालांकि अधिसूचना 29 जुलाई 2025 को जारी की गई लेकिन इन सभी बदलावों को 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी माना जाएगा।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा संस्थागत निगरानी मजबूत होगी और भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक आर्थिक हालात के अनुसार ढाला जा सकेगा।
इस अधिनियम के तहत इन 5 प्रमुख कानूनों में कुल 19 संशोधन किए गए हैं
Reserve Bank of India Act, 1934
Banking Regulation Act, 1949
State Bank of India Act, 1955
Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Act, 1970
Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Act, 1980

