सुप्रीम कोर्ट में दो हफ्ते बाद सुनवाई: 2006 के पुलिस सुधार फैसले और डीजीपी की तदर्थ नियुक्तियों पर उठेंगे बड़े सवाल…

Azad Reporter desk: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों से जुड़े अहम मुद्दों और कुछ राज्यों में DGP की तदर्थ (एड-हॉक) नियुक्तियों पर दो हफ्ते बाद सुनवाई करने का फैसला किया है।
इन मामलों में पूर्व DGP प्रकाश सिंह की वह याचिका भी शामिल है जिसमें उन्होंने DGP चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक आयोग बनाने की मांग की है। इस आयोग में मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को सदस्य बनाने का सुझाव दिया गया है।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि CBI निदेशक की तरह DGP की नियुक्ति के लिए भी तीन सदस्यीय समिति गठित की जाए। वहीं वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश ने झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार 60 साल की आयु पूरी होने पर अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल को रिटायर होने वाले थे लेकिन राज्य सरकार ने उनका कार्यकाल बढ़ाने के लिए केंद्र को पत्र भेजा।
ये याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के 2006 के उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ी हैं जिसमें पुलिस सुधारों के तहत कई सिफारिशें की गई थीं जैसे कि जांच और कानून-व्यवस्था के काम को अलग करना। अदालत ने कहा कि यह मामला गंभीर है और इस पर विस्तार से सुनवाई होगी।
पीठ ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी याचिकाओं की प्रतियां वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को उपलब्ध कराएं जो न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) के रूप में कोर्ट की सहायता करेंगे।


