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झारखंड के राज्यसभा सांसदों ने खर्च नहीं किया विकास का आधा फंड, कई योजनाएं अधूरी…

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Jharkhand: झारखंड से राज्यसभा सांसदों को स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) के तहत 109 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मिली, लेकिन इसमें से सिर्फ 45 करोड़ रुपये यानी लगभग 41% ही खर्च हो पाए हैं। इसका असर यह हुआ कि कई विकास योजनाएं अधूरी रह गईं।

यह साफ दिखाता है कि सांसदों ने जो धन विकास के लिए मिला था उसका पूरा इस्तेमाल नहीं किया। कुछ सांसदों ने तो बेहतर काम किया लेकिन कई योजनाएं कागज़ों तक ही सिमट कर रह गईं।

महुआ मांझी सबसे आगे
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की राज्यसभा सदस्य महुआ मांझी फंड खर्च करने के मामले में सबसे आगे रहीं। उन्होंने 65% राशि खर्च कर 75 योजनाएं पूरी कीं। उनके कामों में गांवों की सड़क, स्कूल बिल्डिंग और सामुदायिक केंद्र जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं।

दीपक प्रकाश ने सबसे ज्यादा खर्च किया पर योजनाएं अधूरी
भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने सबसे ज्यादा धनराशि खर्च की लेकिन उनकी योजनाएं अब तक पूरी नहीं हो सकीं। वहीं भाजपा के ही आदित्य साहू ने खर्च और योजनाओं के पूरा होने में अच्छा संतुलन बनाए रखा। उन्होंने पेयजल, सड़क और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी कीं।

शिबू सोरेन की 831 योजनाएं स्वीकृत
झामुमो के वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन की 831 योजनाएं स्वीकृत हुई हैं लेकिन फंड खर्च का आंकड़ा कम है।

कम फंड खर्च होने की वजहें क्या हैं?
•नौकरशाही की बाधाएं
•प्रशासन से तालमेल की कमी
•योजनाओं की निगरानी और समय पर क्रियान्वयन न होना
•तकनीकी दिक्कतें और बुनियादी ढांचे की कमी

अगर सांसद स्थानीय प्रशासन से मिलकर योजनाओं की नियमित समीक्षा करें और उनके कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो तो फंड का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।

जरूरत है: कड़ी निगरानी, जवाबदेही और समय पर काम पूरा करने की।
वरना हर साल करोड़ों की योजनाएं सिर्फ फाइलों में ही सिमटती रहेंगी और जनता विकास से दूर।