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ईचागढ़ गांव में दो हाथियों का तांडव: दो रातों तक मचाया उत्पात, कई घर क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों में दहशत वन विभाग ने शुरू की निगरानी…

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Seraikela: चांडिल वन क्षेत्र के अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के बाना गांव में दो जंगली हाथियों ने लगातार दो रातों तक भारी तांडव मचाया। हाथियों ने अर्जुन सिंह, शिवराम सिंह और देवव्रत सिंह के घरों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और घर के अंदर रखा अनाज खा गए।

18 जुलाई की रात करीब 1 बजे दो ट्रस्कर हाथियों ने अर्जुन सिंह के घर में घुसकर करीब डेढ़ क्विंटल चावल और एक क्विंटल धान खा लिया। अगले दिन 19 जुलाई की रात 11 बजे फिर वही हाथी आए और घर में रखे अनाज की बोरियां बाहर निकालकर नुकसान पहुंचाया। अर्जुन सिंह किसी तरह अपनी जान बचाकर दूसरे कमरे में भागे, लेकिन हाथी वहां भी पहुंच गए और पूरे घर को तोड़फोड़ कर बर्बाद कर दिया।

लगातार दो रातों की घटनाओं से गांव में भय का माहौल है। हाथियों ने दीवारों पर दांतों के निशान छोड़ दिए और सूंड से दरवाजे तोड़ने की कोशिश की। वहीं गांव में बिजली की आपूर्ति ठप होने के कारण अंधेरे का फायदा उठाकर हाथी आसानी से गांव में घुस पा रहे हैं।

वन विभाग की टीम जिसमें फॉरेस्टर राधारमण ठाकुर, वनरक्षक रामचरण महतो और ईचागढ़ के प्रभारी वशिष्ठ नारायण महतो शामिल थे, उन्होंने गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। अर्जुन सिंह को मुआवजा फॉर्म भरवाया गया और घायल होने पर सहायता देने का भरोसा दिलाया गया। वन विभाग ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए ‘एलिफेंट ड्राइव टीम’ को तैनात किया गया है जो रात में निगरानी करेगी।

वनरक्षक वशिष्ठ नारायण महतो ने बताया कि पहले हाथियों का पारंपरिक मार्ग अयोध्या पहाड़ से दलमा सेंचुरी होते हुए सारंडा जंगल तक था लेकिन 1984 में चांडिल डैम बनने के बाद यह रास्ता बाधित हो गया जिससे हाथी गांवों की ओर भटकने लगे हैं।

झामुमो नेता विश्वरंजन महतो ने कहा कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हाथियों का आतंक बड़ी समस्या बन चुकी है। हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर पर अब उद्योग और इमारतें खड़ी हो गई हैं जंगल की कटाई और पौष्टिक पेड़ों की कमी के कारण हाथी गांवों की ओर आ रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार और उद्योगपतियों में वन्य जीवों को लेकर कोई संवेदनशीलता नहीं है। जंगल में खाने-पीने और रहने की सुविधा न होने के कारण अब हाथी सीधे इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को वन्य जीवों के लिए बेहतर माहौल, सुरक्षित कॉरिडोर और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों पर समान रूप से काम करने की जरूरत है। दलमा सेंचुरी जैसी संरक्षित जगहों पर अब हाथी कम दिखने लगे हैं जो चिंता का विषय है।