जमशेदपुर सम्मेलन में डॉक्टरों की मांग – बच्चों को मिर्गी की दवा मुफ्त मिले, अलग बाल मंत्रालय बने…

Jamshedpur news: जमशेदपुर के साकची स्थित एक होटल में आयोजित दो दिवसीय बाल रोग विशेषज्ञ सम्मेलन में देशभर से आए 200 से ज्यादा डॉक्टरों ने बच्चों के मानसिक और न्यूरोलॉजिकल रोगों पर चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि बच्चों को मिर्गी की दवा मुफ्त उपलब्ध कराई जाए ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे भी सही इलाज से वंचित न रहें।
सम्मेलन में एक और बड़ी मांग उठाई गई कि बच्चों की सेहत, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए देश में अलग बाल मंत्रालय बनाया जाए।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक एसोसिएशन (IAP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. वसंत खलाटकर ने कहा कि आज भी देश के कई हिस्सों में मिर्गी को अंधविश्वास से जोड़ा जाता है। लोग झाड़-फूंक और टोना-टोटका कराते हैं जिससे बच्चों की हालत बिगड़ जाती है। जबकि सही समय पर इलाज और दवा से बच्चा पूरी तरह ठीक हो सकता है। उन्होंने EEG जांच को जरूरी बताया।
रांची के रिम्स अस्पताल के डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि बच्चों में मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल मिर्गी और मानसिक बीमारियों का बड़ा कारण बन चुका है। बच्चे हर बात का हल मोबाइल में खोजने लगे हैं जिससे न्यूरो समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
जमशेदपुर IAP अध्यक्ष डॉ. मिंटू अखौरी सिन्हा और पुणे की डॉ. नीलम श्रीवास्तव ने कहा कि ऑटिज्म बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है खासकर कोविड के बाद इसके मामले कई गुना बढ़े हैं। अब हर 100 में 1 से ज्यादा बच्चा इसकी चपेट में है। ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों में बोलने में देरी सामाजिक मेलजोल में परेशानी और धीमी समझदारी देखी जाती है।
सम्मेलन में डॉक्टरों ने बच्चों की न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, उनके इलाज और लेटेस्ट ट्रीटमेंट पर चर्चा की। सम्मेलन के दूसरे दिन यानी रविवार को टीकाकरण, पोषण योजनाओं और सरकारी भागीदारी जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा।
सम्मेलन में शामिल डॉक्टरों में डॉ. अभिषेक मुंडू, डॉ. आर.के. अग्रवाल, डॉ. केके चौधरी, डॉ. सुधीर मिश्रा, डॉ. रविंद्र कुमार, डॉ. मिथलेश, डॉ. जाय भादुड़ी समेत देशभर के बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे।


