बढ़ती पढ़ाई, घटता स्टाफ!! झारखंड के सरकारी स्कूलों में कामकाज ठप, 4000 से ज्यादा पद खाली, पढ़ाई पर दिख रहा है असर…

Jharkhand : झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई तो आगे बढ़ रही है लेकिन स्कूल का दफ्तर पीछे छूटता जा रहा है। कारण है क्लर्क के हजारों पदों का खाली होना। राज्य के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पिछले 10 सालों से 4000 से ज्यादा क्लर्क के पद खाली हैं। इससे स्कूलों में दफ्तर का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
राज्य सरकार द्वारा अब तक इन पदों पर बहाली के लिए न तो लोक सेवा आयोग और न ही कर्मचारी चयन आयोग ने कोई विज्ञापन जारी किया है। अभी तक जो भी क्लर्क की बहाली हुई है वो सिर्फ अनुकंपा के आधार पर हुई है।
स्कूलों की संख्या और छात्रों की संख्या दोनों बढ़ी हैं। ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ जैसी योजनाओं से निजी स्कूलों से भी बच्चे सरकारी स्कूलों में आ रहे हैं। पढ़ाई अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक हो रही है। ऐसे में दफ्तर का काम भी बढ़ा है लेकिन क्लर्क नहीं हैं।
एक क्लर्क को कई बार 3000 से 4000 बच्चों का काम अकेले संभालना पड़ता है। कई स्कूलों में तो तीनों जरूरी पद निम्न वर्गीय, उच्च वर्गीय और प्रधान लिपिक तीनों ही स्वीकृत नहीं हैं। इससे दिक्कत और भी बढ़ जाती है।
क्लर्क नहीं होने की वजह से शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ दफ्तर का काम भी संभालना पड़ता है जिससे कक्षा संचालन प्रभावित हो रहा है। ये शिक्षा व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
राज्य के स्कूलों में कुल 5500 क्लर्क पद स्वीकृत हैं लेकिन सिर्फ 1500 पदों पर ही बहाली हुई है। बाकी 4000 पद अब भी खाली पड़े हैं। यदि सरकार इन पदों पर बहाली करती है तो इससे शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी और बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।
सरकार को चाहिए कि वह सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में कम से कम 3 क्लर्क के पद स्वीकृत करे और जल्द से जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करे। क्योंकि जब तक स्कूलों में जरूरी स्टाफ नहीं होगा तब तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार मुश्किल है।


