Bokaro: वन विभाग को नहीं लौटाई गई जमीन, माफियाओं ने किए फर्जी कागज, शुरू की खरीद-बिक्री…

Jharkhand: बोकारो के तेतुलिया मौजा की 95.65 एकड़ विवादित जमीन अब भी बोकारो स्टील प्लांट (BSP) के अधीन है। यह जमीन पहले वन भूमि के रूप में अधिसूचित थी जिसे इस्पात संयंत्र और टाउनशिप निर्माण के लिए BSP को वर्ष 1961 में दी गई थी। लेकिन इस जमीन का न तो उपयोग हुआ और न ही इसे वापस किया गया।
वन विभाग के प्रभारी रूद्र प्रताप सिंह ने शिकायत में बताया कि बोकारो स्टील प्लांट कई बार पत्राचार करके यह जमीन वापस करना चाहता था लेकिन वापसी की प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हो सकी। इसी का फायदा उठाकर जमीन माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन की खरीद-बिक्री शुरू कर दी।
शिकायत के अनुसार इस मामले में इजहार, अख्तर और शैलेश कुमार सिंह नाम के लोगों पर आरोप है कि वे जमीन माफिया हैं। इन्हें चास अंचल में तैनात रहे हल्का कर्मचारी रंगनाथ सिंह और बोकारो स्टील प्लांट के कुछ वरीय अधिकारी भी सहयोग करते रहे।
यह जमीन पहले शालू महतो, साहेब राम सिंह, कांदु सिंह, भिखारी सिंह, दुखी सिंह, छुटू सिंह और राम सिंह के कब्जे में थी। वर्ष 1947 में उक्त जमीन बिहार प्राइवेट फारेस्ट एक्ट 1946 की धारा 14 के तहत 24 अप्रैल 1947 को प्राइवेट प्रोटेक्टेड फारेस्ट के रूप में अधिसूचित किया गया था। वर्ष 1955-56 में बिहार भूमि सुधार अधिनियम के तहत उक्त जमीन राज्य सरकार की हो गई थी।
बाद में इसे संरक्षित वन के रूप में अधिसूचित कर हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड (अब बोकारो स्टील प्लांट) को ट्रांसफर किया गया था। प्लांट को कुल 908.98 एकड़ में से 864.21 एकड़ जमीन ही प्राप्त हो सकी, जिसमें तेतुलिया की विवादित 95.65 एकड़ जमीन भी शामिल थी।
हालांकि बोकारो स्टील प्लांट ने वर्ष 1976 और 2010 में जमीन वापसी के लिए पत्र लिखा था लेकिन अब तक यह जमीन न उपयोग में लाई गई और न ही वन विभाग को लौटी। इसी दौरान जमीन माफिया ने इस जमीन को हड़प लिया और बेच भी दिया जो अब एक बड़ा विवाद बन चुका है।


