मेडिकल कॉलेजों में अब फीस और रैगिंग जैसी शिकायतों पर होगी सख्ती, NMC ने लागू की तीन स्तरीय समाधान प्रणाली…

Azad Reporter desk: देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। अब कॉलेजों में फीस वसूली, रैगिंग, इंटर्नशिप स्टाइपेंड में देरी और फैकल्टी की कमी जैसी समस्याओं पर जल्द और सख्त कार्रवाई होगी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने पूरे देश के 700 से अधिक मेडिकल कॉलेजों में तीन स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली लागू कर दी है।
NMC के सचिव डॉ. राघव लांगर के अनुसार छात्रों की शिकायतों को तीन चरणों में सुलझाया जाएगा—
- पहला स्तर: कॉलेज प्रशासन खुद छात्र की शिकायत सुनेगा और समाधान करेगा।
- दूसरा स्तर: यदि कॉलेज से समाधान नहीं होता तो मामला राज्य के मेडिकल शिक्षा निदेशक (DME) के पास जाएगा।
- तीसरा स्तर: फिर भी समाधान नहीं हुआ तो अंत में एनएमसी खुद मामले में हस्तक्षेप करेगा।
इस फैसले को तुरंत लागू करने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और राज्य शिक्षा विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं। यह प्रणाली फीस, स्टाइपेंड, रैगिंग और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में मदद करेगी।
NMC ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर कोई कॉलेज छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज करता है या पारदर्शिता नहीं रखता तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। यह कदम मेडिकल शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
NMC को लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर अब फैकल्टी की संख्या, स्टाइपेंड भुगतान और सुविधाओं की नियमित जांच के लिए निरीक्षण दल बनाए जाएंगे जो समय-समय पर कॉलेजों का दौरा करेंगे।
अब छात्र ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया और अधिक आसान और पारदर्शी हो जाएगी।
NMC का यह फैसला मेडिकल छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इससे छात्रों को लंबे इंतजार और भटकाव से राहत मिलेगी।

