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WHO का बड़ा सुझाव! तम्बाकू, शराब और कोल्ड ड्रिंक की कीमतें 50% तक बढ़ाएं, ताकि बीमारियां कम हों और सरकारों को राहत मिले…

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Azad Reporter desk: WHO ने दुनिया भर के देशों से अपील की है कि वे तम्बाकू, शराब और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों पर टैक्स बढ़ाकर उनकी कीमतों में अगले 10 सालों में 50% तक का इज़ाफा करें। संगठन का कहना है कि इस कदम से न केवल इन चीजों की खपत घटेगी बल्कि इससे होने वाली बीमारियों जैसे डायबिटीज़ और कैंसर में भी कमी आएगी। साथ ही सरकारों को आर्थिक तौर पर भी मदद मिलेगी।

WHO ने यह सुझाव स्पेन के सेविले शहर में हुए संयुक्त राष्ट्र विकास वित्त सम्मेलन में दिया जहां इस अभियान को “3 by 35” नाम दिया गया। यानी साल 2035 तक तम्बाकू, शराब और कोल्ड ड्रिंक तीनों की कीमतों में कम से कम 50% की बढ़ोतरी।

WHO के सीनियर अधिकारी जेरेमी फर्रार ने कहा “स्वास्थ्य कर यानी हेल्थ टैक्स हमारे पास सबसे असरदार उपायों में से एक है। अब वक्त आ गया है कि दुनिया इस दिशा में ठोस कदम उठाए।” WHO का अनुमान है कि अगर देश इस सलाह को अपनाते हैं तो 2035 तक दुनिया भर में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम जुटाई जा सकती है।

संगठन ने बताया कि 2012 से 2022 के बीच 140 देशों ने तम्बाकू पर टैक्स बढ़ाकर उसकी कीमतों में औसतन 50% से ज्यादा का इज़ाफा किया है। अब वही नीति शराब और कोल्ड ड्रिंक पर लागू करने की बात हो रही है।

WHO के इकॉनमी एक्सपर्ट गिलर्मो सैंडोवाल ने उदाहरण दिया कि अगर आज किसी देश में कोई चीज़ 4 डॉलर की है तो 2035 तक उसका दाम बढ़कर 10 डॉलर तक हो सकता है अगर टैक्स को मुद्रास्फीति के साथ जोड़ा जाए।

संगठन भविष्य में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स यानी जरूरत से ज्यादा तैयार किए गए खाने की चीज़ों पर भी टैक्स लगाने की योजना बना रहा है। हालांकि WHO मानता है कि कोल्ड ड्रिंक और शराब इंडस्ट्री इसका विरोध कर सकती है।

इंटरनेशनल बेवरेजेज काउंसिल की डायरेक्टर केट लोटमैन ने WHO के इस कदम को गलत बताते हुए कहा “कोल्ड ड्रिंक पर टैक्स लगाने से अब तक किसी देश में मोटापा कम नहीं हुआ है ना ही सेहत में कोई सुधार दिखा है।”

वहीं डिस्टिल्ड स्पिरिट्स काउंसिल की अधिकारी अमांडा बर्गर ने कहा “सिर्फ टैक्स बढ़ा देने से शराब पीने वालों की आदतें नहीं बदलेंगी। नुकसान वहीं का वहीं रहेगा।”

हालांकि WHO की इस योजना को ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज़ वर्ल्ड बैंक और OECD जैसे बड़े संगठनों का समर्थन मिल रहा है। यह पहल खास तौर पर उन देशों के लिए मददगार साबित होगी जो अब अमेरिका की कटती मदद के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे हैं और अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं।