हिमाचल के लिए बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं बादल! भीषण तबाही में अब तक 51 मौतें, 30 लोग लापता, ₹500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान…

Azad Reporter desk: हिमाचल प्रदेश इस वक्त भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। लगातार हो रही बारिश, बादल फटना और भूस्खलन ने राज्य में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंडी जिले में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं जहां सात जगहों पर बादल फटने से कई घर तबाह हो गए हैं और 10 लोगों की जान चली गई है जबकि 30 लोग अब भी लापता हैं।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की रिपोर्ट के अनुसार 20 जून से 1 जुलाई के बीच 12 जिलों में हुई बारिश और आपदाओं के चलते 51 लोगों की मौत, 22 लोग लापता, और 103 लोग घायल हुए हैं। प्रदेश में 204 मकानों को नुकसान पहुंचा है जिनमें से 22 मकान पूरी तरह से ढह गए हैं।सैकड़ों सड़कें और पुल टूट गए हैं कई गांवों में बिजली और पानी की सुविधा ठप है। अनुमानित नुकसान ₹500 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है।
गोहर, करसोग, थुनाग और धर्मपुर जैसे उपमंडलों में अचानक बादल फटने से गांवों में पानी भर गया, मकान और सड़कें बह गईं।
गोहर में 5 मौतें
सराज में 4 मौतें
करसोग में 1 मौत हुई है।
अब तक 132 लोगों को रेस्क्यू किया गया है लेकिन 22 लोग अब भी लापता हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा “यह हिमाचल के लिए सबसे कठिन समयों में से एक है”
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने NDRF, पुलिस और होमगार्ड की टीमें राहत और बचाव के लिए भेज दी हैं। अब तक 287 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।
लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है और नुकसान का सर्वे तेज़ी से करवाया जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक Climate Change और बेतरतीब निर्माण कार्य, जैसे पहाड़ों की कटाई,पेड़ों का हटाया जाना,अवैज्ञानिक तरीके से सड़क निर्माण, इन सभी वजहों से हर साल मानसून के दौरान आपदाएं बढ़ती जा रही हैं।

