झारखंड में पेसा कानून को लेकर गरमाई सियासत, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का हेमंत सरकार पर तीखा हमला…

Jharkhand: झारखंड में पेसा कानून को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुवर दास ने मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छह साल से राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री हैं फिर भी पेसा कानून अब तक सिर्फ फाइलों में दबा हुआ है। आखिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन किससे डर रहे हैं?
बिष्टुपुर स्थित चैंबर ऑफ कॉमर्स में आयोजित प्रेस वार्ता में रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार जानबूझकर पेसा कानून को लागू करने में देरी कर रही है जो न सिर्फ आदिवासी समाज के साथ धोखा है, बल्कि उच्च न्यायालय के आदेश की भी अवहेलना है। उन्होंने बताया कि 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो महीने में पेसा कानून लागू करने का निर्देश दिया था लेकिन एक साल बीतने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस देरी को लेकर अब झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव और पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव को अवमानना का नोटिस जारी किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आदिवासी मुख्यमंत्री होना सिर्फ एक चुनावी चेहरा था? क्या आदिवासी नेतृत्व सिर्फ वोट लेने तक सीमित है?
रघुवर दास ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2018 में ही पेसा नियमावली को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं लेकिन चुनाव के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार ने 2023 में नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया और उसे वैध भी माना गया लेकिन कैबिनेट से मंजूरी अब तक नहीं मिली।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पेसा नियमावली लागू नहीं हुई तो 15वें वित्त आयोग की ₹1400 करोड़ की राशि लैप्स हो जाएगी जिसका सीधा नुकसान राज्य के गांवों को होगा। उन्होंने कहा कि पेसा कानून लागू होने से ग्रामसभा को खनिज, बालू घाट, तालाब, वनों और स्थानीय संसाधनों पर कानूनी और आर्थिक अधिकार मिलेगा, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पेसा कानून को रोकने में विदेशी धर्म प्रचारक संस्थाओं की भूमिका रही है जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में इसके खिलाफ मुकदमे किए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि झारखंड में केवल पांचवीं अनुसूची लागू होगी न कि छठी।
रघुवर दास ने यह भी कहा कि पेसा कानून सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण नहीं बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जनप्रतिनिधियों मांझी, परगना, पहान, मानकी-मुंडा के अधिकारों की रक्षा का माध्यम है।
उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि शेड्यूल एरिया में थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में स्थानीय युवाओं के लिए दस वर्षों तक आरक्षण की पुरानी व्यवस्था को भी बहाल किया जाए जिसे भाजपा सरकार के दौरान शुरू किया गया था। वर्तमान सरकार ने हाईकोर्ट में एफिडेविट देकर इस व्यवस्था को खुद ही असंवैधानिक बताया और 60-40 की नई नीति लागू कर दी।
रघुवर दास ने चेतावनी दी कि अगर सरकार जल्द पेसा कानून लागू नहीं करती, तो भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं बल्कि झारखंड की अस्मिता, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की है।

