झारखंड निकला अफीम की खेती के खिलाफ देश में सबसे आगे, 27 हजार एकड़ में की गई अवैध फसल की तबाही,नई रणनीति से पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी…

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Jharkhand: झारखंड में अफीम की अवैध खेती के खिलाफ पुलिस ने इस साल अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता ने बताया कि इस बार अफीम के खिलाफ एक नई रणनीति अपनाई गई है जिसके तहत बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई और इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं।

DGP के मुताबिक, राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 27,015.03 एकड़ भूमि में फैली अफीम की खेती को नष्ट किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले सालों की तुलना में इस बार यह संख्या कई गुना ज्यादा है। वर्ष 2022-23 में 5,500.19 एकड़ और वर्ष 2023-24 में 4,853.99 एकड़ में अफीम की खेती नष्ट की गई थी।

झारखंड के जिन जिलों में अफीम की खेती सबसे अधिक की जा रही थी वहां पर विशेष ध्यान दिया गया। खूंटी, चतरा, लातेहार और रांची जिले इस अवैध खेती के प्रमुख केंद्र रहे हैं।

•खूंटी जिले में इस वर्ष सबसे अधिक 15,246.79 एकड़ में अफीम की फसल नष्ट की गई।

•रांची जिले में 6,843.47 एकड़ में कार्रवाई की गई।

•चतरा जिले में 1,566.46 एकड़ और•लातेहार में 754 एकड़ में अफीम की खेती नष्ट की गई।

इसके अलावा सरायकेला, चाईबासा, हजारीबाग, पलामू, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और गढ़वा जैसे जिलों में भी अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई की गई। DGP ने कहा कि आने वाले समय में यह अभियान और तेज होगा और अगले वर्ष और बेहतर परिणामों की उम्मीद है। चतरा जिले में विशेष तौर पर बड़े स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

इस वर्ष के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अफीम के खिलाफ अभियान चलाने में झारखंड पूरे देश में अग्रणी रहा है। नई रणनीति और सख्त निगरानी के चलते राज्य में अफीम की खेती को जड़ से खत्म करने की दिशा में लगातार सफलता मिल रही है।

झारखंड पुलिस की यह कोशिश न केवल नशे के कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में अहम है बल्कि यह राज्य के युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से भी बचाने का बड़ा कदम साबित हो रहा है।